महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों काफी चर्चा में है। पिछले कुछ समय से यहां के राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच नए गठजोड़ और टूटन की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर कौन किसके साथ है। इसी बीच, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के रुख में बदलाव देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे, जिन्होंने कुछ साल पहले बीजेपी से गठबंधन तोड़ा था, अब एक बार फिर से बीजेपी के करीब नजर आ रहे हैं।
उद्धव ठाकरे का बीजेपी की तरफ झुकाव
पिछले कुछ महीनों से उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने शुरू कर दिए हैं। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रशंसा की गई। अखबार ने लिखा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंत्रियों के ओएसडी (Officer on Special Duty) और निजी सचिवों की नियुक्ति का अधिकार छीनकर एक अच्छा कदम उठाया है। साथ ही, यह भी कहा गया कि पीएम मोदी भ्रष्टाचार मिटाने के लिए प्रयासरत हैं।
इससे पहले भी उद्धव ठाकरे और उनके नेताओं ने कई बार बीजेपी और देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की है। उद्धव खुद मुख्यमंत्री फडणवीस से कई बार मिल चुके हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उद्धव और फडणवीस की साथ ली गई तस्वीर ने भी चर्चा बढ़ा दी थी।
महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव
पिछले पांच सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। 2019 में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के टूटने के बाद उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2022 में शिवसेना में विद्रोह हुआ और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए। इसके बाद उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
विधानसभा चुनावों में हार के बाद उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ फिर से रिश्ते मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। ऐसा लगता है कि उद्धव अब कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी से दूरी बनाकर बीजेपी के साथ जाने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस के लिए मुश्किलें
उद्धव ठाकरे के बीजेपी के करीब जाने से कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। महाराष्ट्र के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन पहले ही खराब रहा था। अब अगर शिवसेना (उद्धव गुट) बीजेपी के साथ चली जाती है, तो कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में अपनी जगह बनाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
क्या है उद्धव की रणनीति?
उद्धव ठाकरे के इस बदलते रुख के पीछे उनकी राजनीतिक रणनीति हो सकती है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद उद्धव को लगता है कि बीजेपी के साथ जुड़कर ही वे फिर से राजनीति में मजबूत हो सकते हैं। इसके अलावा, बीजेपी के साथ जुड़ने से उन्हें सत्ता में वापसी का रास्ता भी मिल सकता है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों जो घटनाक्रम चल रहा है, वह काफी दिलचस्प है। उद्धव ठाकरे का बीजेपी की तरफ झुकाव और कांग्रेस से दूरी बनाने की कोशिश राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दे सकती है। आने वाले समय में देखना होगा कि उद्धव ठाकरे की यह रणनीति कितनी कामयाब होती है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।