समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व सांसद आजम खान का नाम एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े सम्मान से लिया जाता था। उन्हें रामपुर का “मिनी मुख्यमंत्री” कहा जाता था। लेकिन आज स्थिति यह है कि आजम खान सीतापुर जेल में बंद हैं, और उनके परिवार को भी कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में उनके परिवार को शत्रु संपत्ति मामले में नियमित जमानत मिली है, लेकिन यह राहत अस्थायी है। आजम खान और उनके परिवार के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं।
शत्रु संपत्ति मामले में जमानत
रामपुर की एक विशेष अदालत ने आजम खान के परिवार के तीन सदस्यों—उनकी पत्नी तज़ीन फातिमा, बेटे अदीब आजम खान और बहन निखत अखलाक—को शत्रु संपत्ति मामले में नियमित जमानत दे दी है। यह मामला आजम खान द्वारा स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है, जहां शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के आरोप लगे हैं। शत्रु संपत्ति वह संपत्ति होती है जो 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान जाने वाले लोगों की थी। आरोप है कि आजम खान और उनके परिवार ने इस संपत्ति को गलत तरीके से अपने नाम कर लिया।
आजम खान का राजनीतिक पतन
आजम खान एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। लेकिन 2017 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद उन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें अतिक्रमण, चोरी, सरकारी संपत्ति पर कब्जा और हेट स्पीच जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। आजम खान अभी भी सीतापुर जेल में बंद हैं, और 25 मार्च को हेट स्पीच मामले में उनकी पेशी होनी है। उनके परिवार पर भी 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जो उनकी राजनीतिक विरासत को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
राजनीतिक भविष्य पर सवाल
आजम खान और उनके परिवार का राजनीतिक भविष्य अब अनिश्चित हो गया है। एक समय रामपुर की सड़कों पर शेर की तरह चलने वाले आजम खान आज जेल की सलाखों के पीछे हैं। उनके बेटे अदीब आजम खान भी राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन मुकदमों के बोझ के कारण उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई हैं। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक साजिश बताती है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामले चल रहे हैं।