दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने चुनाव से पहले बाहरी लोगों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि पूर्वांचल के लोगों के वोटर कार्ड बनाकर उनकी पार्टी को हराने की साजिश रची जा रही है। लेकिन, जनता ने उनकी इस राजनीति को खारिज कर दिया। अब यही खेल ममता बनर्जी बंगाल में खेल रही हैं। क्या ममता बनर्जी को भी हार का डर सताने लगा है? क्या वे अपनी सत्ता बचाने के लिए नफरत की राजनीति पर उतर आई हैं?
ममता बनर्जी का बिहारियों पर हमला
ममता बनर्जी ने हाल ही में बाहरी लोगों को लेकर विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी बंगाल में बाहरी लोगों के वोटर कार्ड बना रही है, ताकि उनकी पार्टी को हराया जा सके। ममता ने कहा, “बंगाल के बाहर के लोगों को हम वोट करने नहीं देंगे। बीजेपी वाले कान खोलकर सुन लें, हम ऐसा होने नहीं देंगे।”
यह वही भाषा है जो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में इस्तेमाल की थी। केजरीवाल ने भी दावा किया था कि पूर्वांचल के लोगों के वोटर कार्ड बनाकर उनकी पार्टी को हराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, दिल्ली की जनता ने इस राजनीति को नकार दिया। क्या अब बंगाल की जनता भी ममता बनर्जी की इस रणनीति को खारिज कर देगी?
क्या ममता बनर्जी को हार का डर सताने लगा है?
ममता बनर्जी ने 2011 में बंगाल में सत्ता संभाली थी। तब से वे लगातार सत्ता में हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से बीजेपी बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं। इससे ममता बनर्जी की चिंता बढ़ गई है।
अब ममता बनर्जी बाहरी लोगों को लेकर विवादित बयान दे रही हैं। क्या यह उनकी हार के डर का संकेत है? क्या वे अपनी सत्ता बचाने के लिए नफरत की राजनीति पर उतर आई हैं?
दिल्ली की कहानी क्या बंगाल में दोहराई जाएगी?
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने बाहरी लोगों को लेकर जो राजनीति की, वह फेल हो गई। जनता ने उनकी इस रणनीति को खारिज कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या बंगाल में भी यही कहानी दोहराई जाएगी? क्या बंगाल की जनता ममता बनर्जी की इस राजनीति को नकार देगी?
बंगाल की जनता को विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था चाहिए। लेकिन, ममता बनर्जी बाहरी-भीतरी की राजनीति कर रही हैं। क्या यह हार से पहले का डर है? या फिर यह सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश?