उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल होकर उन्होंने एक बार फिर अपनी मुस्लिम समर्थक छवि को मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, उनकी यह रणनीति उनके हिंदू विरोधी रवैये को भी उजागर करती है। आइए जानते हैं कि कैसे अखिलेश यादव की राजनीति हिंदुओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रही है और उनके कार्यकाल में हिंदुओं को किस तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
रोजा इफ्तार पार्टी और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति
अखिलेश यादव ने हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक रोजा इफ्तार पार्टी में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने धर्मगुरुओं के साथ खजूर का रोजा इफ्तार किया और मुस्लिम समुदाय के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। हालांकि, यह उनकी मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने की रणनीति का हिस्सा लगता है। उनकी यह चाल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई और लोगों ने उन्हें हिंदू विरोधी तक कहा।
आजम खान का धर्मांतरण रैकेट
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने हिंदुओं को जबरन मुस्लिम बनाने का एक बड़ा रैकेट चलाया था। मुजफ्फरनगर में दर्जनों परिवारों ने आरोप लगाया कि आजम खान ने उन्हें धमकी देकर मुस्लिम बनवाया और उनकी जमीन-जायदाद हड़प ली। इनमें से कई लोगों ने अब हिंदू धर्म में वापसी की है और योगी आदित्यनाथ सरकार का धन्यवाद किया है।
मुजफ्फरनगर दंगे और सपा की भूमिका
अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए मुजफ्फरनगर दंगे उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे भीषण दंगों में से एक थे। इन दंगों की जड़ में आजम खान की भूमिका थी। जब दो हिंदू भाइयों के हत्यारे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो आजम खान ने उन्हें छोड़ने का आदेश दिया। जब अधिकारियों ने मना किया, तो उनका तबादला कर दिया गया। इसके बाद ही दंगे भड़के और सैकड़ों लोगों की जान चली गई।
योगी सरकार और हिंदुओं की घर वापसी
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने हिंदुओं को न्याय दिलाने का काम किया है। अब तक 550 से अधिक हिंदुओं ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म में वापसी की है। ये लोग अब अपने समाज में सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी रहे हैं। यह योगी सरकार की सख्त नीतियों और न्यायप्रियता का परिणाम है।
अखिलेश यादव की राजनीति हमेशा से मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने पर केंद्रित रही है। उनके कार्यकाल में हिंदुओं को प्रताड़ना झेलनी पड़ी और धर्मांतरण जैसे गंभीर मामले सामने आए। आज योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंदुओं को न्याय दिलाया है और उनकी घर वापसी को संभव बनाया है। अखिलेश यादव की हिंदू विरोधी छवि और मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति उनकी विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
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