ओवैसी का बयान
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक सभा को संबोधित करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता की बात की। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-25 हर नागरिक को धार्मिक आजादी का अधिकार देता है। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह धर्म के बारे में किसी मुख्यमंत्री से नहीं, बल्कि धार्मिक विद्वानों से सीखेंगे। ओवैसी ने यह भी कहा कि मुसलमानों को मस्जिद जाने का अधिकार है और वे इस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
हालांकि, ओवैसी के इस बयान के पीछे की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सिर्फ वोटबैंक को खुश करने की कोशिश है? क्या धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर मुस्लिम समुदाय को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है?
संभल में होली: सुरक्षा के बीच खेला गया त्योहार
संभल में होली के मौके पर जो तस्वीरें सामने आईं, वे चौंकाने वाली थीं। होली खेलने वाले हिंदुओं के आसपास पुलिस बल की भारी तैनाती थी। सुरक्षा बलों ने हाथों में डंडे लिए हुए थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि देश में धार्मिक त्योहारों को मनाने के लिए भी सुरक्षा के घेरे की जरूरत पड़ रही है।
क्या यही है धार्मिक स्वतंत्रता? क्या यही है भाईचारे की मिसाल? जब हिंदुओं को अपना त्योहार मनाने के लिए पुलिस बल की जरूरत पड़े, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या हम वाकई में धार्मिक सद्भाव की बात कर सकते हैं?
धार्मिक स्वतंत्रता बनाम मौलिक कर्तव्य
संविधान का अनुच्छेद-25 हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन क्या यह अधिकार दूसरों के अधिकारों को कुचलने का लाइसेंस है? ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता की बात की, लेकिन क्या उन्होंने मौलिक कर्तव्यों की बात की?
मौलिक कर्तव्यों में यह भी शामिल है कि हम दूसरों के धर्म और विश्वास का सम्मान करें। जब होली और जुम्मा एक ही दिन पड़ते हैं, तो हिंदुओं ने कभी नहीं कहा कि मुसलमान नमाज न पढ़ें। लेकिन क्या मुस्लिम समुदाय ने हिंदुओं को होली खेलने की आजादी दी? संभल की घटनाएं इस सवाल को और मजबूत करती हैं।
15 मिनट की धमकी: राजनीति का नया हथियार?
ओवैसी के एक वीडियो में उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है, “अभी 15 मिनट बाकी हैं।” यह बयान उनके समर्थकों के बीच खूब वायरल हुआ। लेकिन क्या यह धमकी भरा बयान धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है? क्या यह देश में तनाव बढ़ाने का प्रयास है?
ओवैसी ने शुभेंदु अधिकारी के बयान का विरोध किया, लेकिन क्या उन्होंने अपने समर्थकों को 15 मिनट की धमकी देने पर कोई कार्रवाई की? यह सवाल उनकी राजनीतिक मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
धार्मिक स्वतंत्रता या राजनीतिक फायदा?
धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन यह दूसरों के अधिकारों को कुचलने का बहाना नहीं बन सकता। संभल की घटनाएं और ओवैसी के बयान इस बात को रेखांकित करते हैं कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
देश में सभी धर्मों के लोगों को अपने त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार मौलिक कर्तव्यों के साथ जुड़ा हुआ है। हमें दूसरों के धर्म और विश्वास का सम्मान करना चाहिए। केवल तभी हम एक सही मायने में धार्मिक सद्भाव और भाईचारे की बात कर सकते हैं।