जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अगर राम मंदिर के लिए सत्ता छोड़नी पड़े, तो भी कोई परवाह नहीं,” तो यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि हिंदू समाज की आस्था और संकल्प की अभिव्यक्ति थी। यह वही संकल्प है जिसने दशकों से चले आ रहे राम जन्मभूमि आंदोलन को एक नई दिशा दी। योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ राम मंदिर निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, बल्कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति को भी बेनकाब किया। आइए, जानते हैं कैसे सीएम योगी ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए एक नया इतिहास रचा।
राम मंदिर: हिंदू आस्था का प्रतीक
राम मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि हिंदू समाज की आस्था और अस्मिता का प्रतीक भी है। सदियों से चले आ रहे संघर्ष के बाद अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। यह न सिर्फ हिंदुओं के लिए गर्व का विषय है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी है।
योगी आदित्यनाथ का संकल्प: सत्ता से ऊपर राम
22 मार्च को अयोध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जो कहा, वह हर भारतीय के दिल को छू गया। उन्होंने कहा, “अगर राम मंदिर के लिए सत्ता छोड़नी पड़े, तो भी कोई परवाह नहीं।” यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि हिंदू समाज की आस्था और संकल्प को दर्शाता था। योगी ने साफ किया कि उनके लिए सत्ता से ऊपर राम हैं और वह रामलला के सेवक बनने में गर्व महसूस करते हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का तुष्टिकरण
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति को भी बेनकाब किया। 1990 में मुलायम सिंह यादव ने हिंदू कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, ताकि मुस्लिम वोटबैंक को खुश किया जा सके। आज अखिलेश यादव भी उसी राह पर चल रहे हैं। महाकुंभ जैसे हिंदुओं के महापर्व का प्रभारी मुस्लिम नेता आजम खान को बनाना, यह साफ दिखाता है कि उनकी नीतियां हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए बनाई जाती हैं।
अयोध्या का नया स्वरूप: विकास और आस्था का संगम
सीएम योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ राम मंदिर निर्माण को गति दी, बल्कि अयोध्या के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया। रामकथा पार्क का उद्घाटन, युवा उद्यमियों को लोन देना, और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना, यह सब अयोध्या को एक नई पहचान दे रहा है। अयोध्या अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विकास और आस्था का संगम बन चुका है।
राम मंदिर निर्माण सिर्फ एक इमारत का निर्माण नहीं है, बल्कि हिंदू समाज की अस्मिता और आस्था की जीत है। योगी आदित्यनाथ ने साबित कर दिया कि सत्ता से ऊपर धर्म और संस्कृति का स्थान है। अब देश जाग चुका है, और रामभक्तों की आस्था को कोई नहीं दबा सकता।